THIS SITE IS MADE FOR RAJPUTS' HISTORY
वे कौन से राजपूत थे जिन्होंने ज़मीन और चौधर के बदले मुग़लों को लड़कियाँ दीं?
वे कौन से राजपूत थे जिन्होंने मुग़लों को लड़कियाँ दीं?
आज एक बात आम चलती है कि राजपूतों ने मुगलों को हरम में बेटीआं दी हम इस बात का बहुत बुरा मानते है। लेकिन हमें यह नहीं पता कि वह कौन लोग थे जिन्होंने मुगलों को बेटीआं दी।
अगर हम family tree या padigree के हिसाब से खोज करें तो पता लगता है कि मुगलों के साथ दो तरह से राजपूतों ने रिश्ते बनाए
एक हिन्दू राजाओं ने मुस्लिम राजाओं के साथ विवाह संबंध बनाए। जो एक राजनीति का हिस्सा था।
दूसरा ऐसे लोग थे जिन्होंने लालच में आकर अपनी बेटीआं मुग़ल शासकों को दी। अब यह सवाल उठता है कि क्या वह हमारे बज़ुर्ग थे?
जवाब है ''नहीं''
अगर जवाब नहीं है तो फिर अगर कोई कहता है कि राजपूतों ने मुगलों को बेटीआं दी तो हम गुस्सा क्यों करते है? अब सवाल उठता है कि वे कौन से राजपूत थे जिन्होंने ज़मीन और चौधर के बदले मुग़लों को लड़कियाँ दीं?
आज जब भी इंटरनेट पर राजपूत इतिहास पर कोई पोस्ट आती है, तो कुछ राजपूत विरोधी लोग कमेंट में लिखते हैं कि राजपूतों ने मुग़लों को लड़कियाँ दीं। तो कुछ गर्वित राजपूत इन लोगों से भिड़ जाते हैं कोई कोई पढ़ कर इस को सत्य समझ लेता है और चुप्प हो जाता है। लेकिन इन दोनों को यह नहीं पता कि मुगलों को लड़कियाँ किसने दीं? जिन्होंने दी उनके वंशज आज कहाँ हैं? क्या वे आज भी राजपूत कहलाते हैं?
आज अगर हम अकबर के समय की लिखतें, मुसलमानों की लिखतें, अंग्रेज़ों की लिखतें या भारतीय मूल के कुछ लेखकों के ऐतिहासिक कागज़ात पढ़ें, तो हमें इन लोगों के बारे में पता चलता है। कुछ लोग तो अपनी पोतियों (बेटों की बेटीआं) को हरम में देते हुए भी देखे जाते हैं।
12वीं सदी के बाद मुसलमानों का असर बढ़ा। कुछ क्षत्रिओं ने अपनी चौधर बनाए रखने के लिए मुग़लों से गठबंधन किये, लेकिन आपने खून पर गौरव करने वाले राजपूत ऐसी घटना देखकर खाप पंचायत बुलाते थे और उस परिवार को क्षत्रिय वर्ग से निकाल दिया जाता था। साथ ही उस परिवार को शूद्र वर्ग में लिख दिया जाता था। मुगलों के आने से ऊंची जाति और नीची जाति का दबदबा बन गया। जो इंसान ऐसा करता था, अपनी बेटी मुगल को दे देता था, या कोई क्षत्रिय दूसरी जाति में शादी कर लेता था, उसे क्षत्रिय वर्ण से निकाल दिया जाता था, बेटी देने और बेटी लेने का रिश्ता खत्म कर दिया जाता था। क्षत्र्य बिरादरी से निकाले जाने के बाद मज़बूरन उसे दूसरे वर्गों से संबंध बनाने के लिए मज़बूर होना पड़ता था।
जो कोई भी क्षत्र्य धर्म या समाज विरोधी काम करता था, उसके खिलाफ सामाजिक कार्रवाई की जाती थी, वह या तो मुसलमान बन जाता था, अगर मुसलमान नहीं बनता था, तो उसे शूद्र का दर्जा दिया जाता था। जो मुग़ल शासकों के नज़दीक होता था वह अपना गोत्र लिख लेता था नहीं तो समाज से निकले वियक्ति को उस का गोत्र लिखने की भी इज़ाज़त नहीं थी। वह अपनी नई जाति बना लेता था। लेकिन उसे क्षत्रिय जाति में वापस शामिल नहीं किया जाता था। आज भी बहुत लोग कहते हैं कि हम भी क्षत्र्य है लेकिन वह आपने वर्ग शूद्र लिखते हैं। कारण यही है कि कभी यह लोग भी राजपूत थे लेकिन मुगलों को हरम में बेटीआं देने के कारण बिरादरी से निकले गए। सब से बड़ी बात कि आज बही लोग कहते हैं कि राजपूतों ने मुगलों को बेटीआं दी हम लोगों को सच्चे इतिहास की जानकारी ना होने से हम यह नहीं कह पाते कि मुगलों को बेटीआं देने वाले तो तुम हो।
मुगलों के भारत जीतने का एक बड़ा कारण यह था कि बिरादरी से निकाले गए ये लोग मुगलों में शामिल हो गए और अपने ही लोगों के खिलाफ खड़े हो गए। लेकिन उन्हें एक नुकसान यह हुआ कि उन्हें क्षत्रिय जाति में वापस जाने का मौका नहीं दिया गया।
Writer and Researcher
Satinder Singh Parhar